गंगा उद्वह परियोजना: जानें हाथीदह से किस टेक्नोलॉजी से राजगीर, नवादा-गया पहुंच रहा गंगाजल

बिहार सरकार का भागीरथ प्रयास यानी गंगाजल को नालंदा, नवादा और गया ले जाने का काम अंतिम चरण में है. पहले प्वाइंट यानी नालंदा और नवादा के सीमा क्षेत्र में बने वाटर टैंक तक पानी पहुंच गया है. हाथीदह में गंगा नदी से कैनाल के द्वारा गंगाजल पंप हाउस में लाया जाता है. इसके दूसरे किनारे पर सिमरिया घाट है जहां लगे बड़े-बड़े तीन मोटरों से गंगाजल को करीब 92 किलोमीटर दूर नवादा के मोतनाजे डिटेंशन टैंक और वहा से थोड़ी दूर स्थित राजगीर के घोड़ा कटोरा जलाशय में भेजा जाएगा.

 

कैनाल से गंगाजल पंप हाउस में लाने के बाद सरकार के पास सबसे बड़ी चुनौती पाइपलाइन के जरिए गंगाजल को नवादा डिटेंशन टैंक तक पहुंचाने की थी. इसके लिए बड़े से पाइप का सहारा लिया गया . जिस प्रकार गैस और पेट्रोल के पाइप लाइन बिछाए जाते हैं कुछ उसी तरीके से 1.2 मीटर चौड़ी पानी की पाइप लाइन बिछायी गयी. पाइपलाइन ज्यादातर जगहों पर जमीन से 10 फीट नीचे है. सड़क के किनारे जमीन के अंदर पाइपलाइन बिछाया गया है और कई जगहों पर ब्लू कलर का पाइप लाइन का एक हिस्सा मेंटेनेंस और एयर फ्लो के लिए बाहर रखा गया है. गंगा जल आपूर्ति योजना लगभग 4200 करोड़ की है


2020 से काम शुरू हुआ था

हाथीदह से 92 किलोमीटर का पाइप लाइन है. 2.4 मीटर ऊंचे ब्यास का पाइप लाइन बिछाया गया है. हाथीदह से सबसे पहले गंगा नदी का पानी डिटेंशन टैंक नवादा जिला के मोतनाजे में पहुंचेगा. 5 घण्टे तक डिटेंशन टैंक से वाटर सप्लाई की क्षमता है. डिटेंशन टैंक में 11 मोटर हैं जिसमें 9 फिलहाल इंस्टाल हैं. पानी यहां से 3 बड़े पम्प से गया के तेतर और मानपुर में जायेगा. 3 पम्प से राजगीर को शुद्ध पेयजल आपूर्ति की जाएगी. 3 पम्प से राजगीर के घोड़ा कटोरा स्थित जलाशय में पानी स्टोर किया जाएगा जबकि बाकी 2 पंप से पानी नवादा के सकरी नदी स्थित पौरा निर्माणाधीन WTP में भेजा जाएगा जिससे नवादा शहर में जलापूर्ति की जाएगी.

 

इस योजना से 3 प्रमुख शहर राजगीर, गया और बोधगया, नवादा में वर्ष 2051 तक पेयजल की आपूर्ति की जा सकेगी. गंगा जल आपूर्ति योजना की निर्माण एजेंसी से अगले 5 साल तक रख रखाव करेगी. डिटेंशन टैंक में गंगाजल पहुंचने के बाद इसे वहां से तकरीबन 200 मीटर की दूरी पर स्थित घोड़ा कटोरा जलाशय में भेजा जाएगा. पूरे साल में 4 महीने होने वाले बरसात के मौसम में पानी को हाथीदह से पीस डिटेंशन टैंक में लाया जाएगा और वहां से इस जलाशय में पानी भरा जाएगा जिससे बाकी बचे साल के 8 महीने पेयजल के लिए जलापूर्ति और सिंचाई की योजना चलाई जाएग.

 

गंगा जल जलापूर्ति योजना के पहले चरण के अंत में बारी आती है गंगाजल को लोगों के घरों तक पहुंचाना. इसके लिए गंगा जल को मोतनाजे डिटेंशन सेंटर से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जाएगा जहां से पानी को शुद्ध कर राजगीर और उसके आसपास के गांवो में लोगों के घरों तक नल से गंगाजल पहुंचाया जाएगा.

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