तिरंगे में लिपटा शहीद रामानुज का पार्थिव शरीर पालीगंज पहुंचा, देशभक्ति नारों से गूंजा आसमान

लद्दाख में सेना की बस के नदी में गिरने के हादसे में शहीद हुए पालीगंज के लाल रामानुज कुमार का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गांव परियों पहुंचा. इसके साथ ही इलाके के लोगों ने ‘रामानुज अमर रहे’ का नारा लगाना शुरू कर दिया. भारत माता के जयकारे और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों से पूरा इलाका गूंज रहा था. अधिकारी और गांव-घर के लोग श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों की संख्या में जुटे हैं. मौके पर पालीगंज एसडीम मुकेश कुमार, पालीगंज के एएसपी के अलावा अन्य कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद हैं. सेना की गाड़ी में शहीद का शव उसके घर तक पहुंचा.

 

बता दें कि लद्दाख में हुए हादसे में सेना के 7 जवान शहीद हो गए थे. इन 7 जवानों में एक जवान पटना जिले के पालीगंज अनुमंडल क्षेत्र के परियों गांव के रहनेवाले ललन यादव का सबसे छोटा बेटा रामानुज कुमार भी थे. रामानुज के शहीद होने की सूचना के बाद से ही गांव और परिवार में मातम पसर गया था. रामानुज के पिता सदमे में हैं, वे बार-बार बेहोश हो जा रहे हैं. मां और दोनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है और परिवार के लोग शोक में डूबे हैं.

बता दें कि ललन यादव के तीन बेटा और दो बेटियों में रामानुज सबसे छोटे थे. 23 सितंबर 2016 को उनका चयन महाराष्ट्र के मराठा रेजीमेंट के लिए हुआ था. रामानुज के दो बड़े भाइयों में एक रेलवे की नौकरी करते हैं जबकि एक भाई प्राइवेट कंपनी में. शहीद रामानुज के चाचा इंद्रदेव प्रसाद यादव ने बताया कि फिलहाल रामानुज लद्दाख में पोस्टेड था. पिछले महीने 20 अप्रैल को बहन की शादी में वह घर आया था और 26 अप्रैल को ड्यूटी पर चला गया था. चाचा ने बताया कि स्थानीय पुलिस और मुखिया ने उन्हें इस हादसे की सूचना दी. शहीद जवान रामानुज के चचेरे भाई कुंदन ने बताया कि कल शाम 6:00 बजे स्थानीय पुलिस प्रशासन और पंचायत के प्रतिनिधियों से सूचना मिली कि रामानुज लद्दाख में सड़क हादसे में शहीद हो गए हैं.

 

बता दें कि लद्दाख के तुरतुक सेक्टर में हुई इस दुर्घटना में भारतीय सेना के 7 जवानों की जान चली गई थी, जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे. सेना के प्रवक्ता के मुताबिक, 26 सैनिकों का एक दल परतापुर में ट्रांजिट कैंप से हनीफ सब-सेक्टर में एक अग्रिम स्थान की ओर बढ़ रहा था. सुबह लगभग 9 बजे, थोइस से लगभग 25 किमी दूर वाहन सड़क से फिसलकर लगभग 50-60 फीट नीचे श्योक नदी में जाकर गिरा. इस हादसे में 7 जवानों को मृत घोषित किया गया था.

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