CSE Result: मजदूर के बेटे विशाल कुमार ने पास की UPSC परीक्षा, बकरी-भैंस पालकर मां ने पढ़ाया, पढ़ें सक्सेस स्टोरी

कहते हैं यदि सच्ची लगन हो तो तमाम असुविधाओं के बाद भी सफलता आपके कदम चूमती है. गुदड़ी के लाल विशाल कुमार ने कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है. मजदूर पिता के बेटे विशाल कुमार ने देश की प्रतिष्ठित UPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त की है. मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड स्थित मकसूदपुर गांव के रहनेवाले विशाल ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 484वीं रैंक हासिल की है.

 

यहां यह बता दें कि विशाल के पिता मजदूरी करते थे. उनकी मौत हो चुकी है. पिता का सिर से साया उठा तो विशाल और उनके भाई का लालन-पालन करने के लिए मां रीना देवी ने काफी संघर्ष किया. बकरी और भैंस पालना शुरू किया. इसे से परिवार का खर्च चलता था और बेटों की पढ़ाई भी. मां ने अपने बेटे को कभी अहसास नहीं होने दिया कि उसके पिता नही हैं. रीना देवी का कहना है कि मेरे बेटे ने बहुत संघर्ष किया है जिसके कारण आज उसे ये सफलता मिल सकी है.

बचपन से ही मेधावी रहा है विशाल

विशाल की मां बताती हैं कि विशाल बचपन से ही काफी तेज रहा है. उसने मैट्रिक की परीक्षा में जिला में प्रथम स्थान प्राप्त किया था. वहीं, विशाल के छोटे भाई राहुल बताते हैं कि उनके बड़े भाई विशाल ने काफी संघर्ष करके इस मुकाम को पाया है. पैसे की कमी की वजह से उन्होंने कई जॉब किया, वहीं उन्होंने अभयानंद सर के सुपर 30 में पढ़ाई की.

 

पिता की मौत के बाद भी हिम्मत नहीं हार

विशाल की सफलता से गांव के लोग भी काफी खुश हैं. ग्रामीण अमरेंद्र कुमार कहते हैं कि पिता की मौत के बाद मां रीना देवी की तपस्या का परिणाम है कि आज विशाल ने गांव का नाम रौशन किया है. विशाल अपने शिक्षक गौरीशंकर के मार्गदर्शन में शुरू से आगे बढ़ रहे थे. गांव के ही शिक्षक गौरीशंकर उन्हें कदम कदम पर सहयोग कर UPSC के लिए प्रेरित करते थे. आज भी विशाल अपने शिक्षक से बिना पूछे कोई काम नहीं करते.

 

कानपुर आईआईटी से किया बीटेक

विशाल कुमार के शिक्षक बताते हैं कि उनकी शिक्षा गांव के माध्यमिक विद्यालय से हुई. बाद में हाई स्कूल की पढ़ाई भी वहीं से ही की. वह शुरू से ही पढ़ाई में परिश्रमी और बुद्धिमान रहे हैं. वर्ष 2011 में जिला में बोर्ड परीक्षा में टॉप करने के बाद विशाल कुमार ने आगे की पढ़ाई की शिक्षकों के मार्गदर्शन से उन्हें पटना के आईआईटी की तैयारी की आईआईटी की परीक्षा में 7000 वी रैंक प्राप्त किया.

 

एलेन इंस्टीट्यूट में बतौर शिक्षक किया काम

विशाल का एडमिशन ने आईआईटी कानपुर में हुआ और उन्होंने वहां से अपनी बीटेक पूरी की. विशाल कुमार के स्कूली शिक्षक उनके संघर्ष के बारे में बताते हैं कि आईआईटी कानपुर से बीटेक करने के बाद उन्होंने रिलायंस कंपनी में नौकरी की. बाद में विशाल एलेन इंस्टीट्यूट में शिक्षक के तौर पर पढ़ाने लगे. इसी समय उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा देने का निश्चय किया.

 

पहले प्रयास में प्राप्त की बड़ी सफलता

विशाल कुमार के आईएएस की सफलता में उनके शिक्षक का बहुत योगदान रहा है जिन्होंने आर्थिक और मानसिक रूप से सहयोग देते हुए उन्हें पूरे समय आईएएस की पढ़ाई करने के लिए लगा देने को कहा था. इसके बाद विशाल ने अपने प्रथम प्रयास में ही सिविल सेवा परीक्षा पास कर शिक्षकों और परिजनों का नाम रोशन किया. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मकसूदपुर गांव के रहने वाले विशाल ने अपने पहले ही प्रयास में 484वीं रैंक प्राप्त की है.

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