Asia Cup: रोहित शर्मा के लिए लकी है एशिया कप, जो विराट कोहली नहीं कर पाए वो कर दिखाया था

Asia Cup: भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे सफल कप्तानों की जब भी बात होगी, तो कुछ नाम जुबां पर सबसे पहले आएंगे. इसमें मोहम्मद अजहरुद्दीन, सौरव गांगुली, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली शामिल हैं. धोनी ने बतौर कप्तान भारत को 2 विश्व कप जिताए हैं. वहीं, गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया भले ही विश्व कप नहीं जीती, लेकिन, उसने विदेश में जीतने के सिलसिले की शुरुआत की. विराट कोहली का कद भी बतौर कप्तान किसी भी सूरत में कम करके नहीं आंका जा सकता. उनकी अगुआई में भारत ने सबसे अधिक 40 टेस्ट जीते. साथ ही तेज गेंदबाजों की नई पौध तैयार हुई.

अब अगर इस फेहरिस्त में अगला नाम रोहित शर्मा का शामिल हो जाए, तो किसी को हैरानी नहीं होगी. रोहित पिछले साल व्हाइट बॉल क्रिकेट में भारत के फुलटाइम कप्तान बनाए थे और इस साल फरवरी में उन्हें विराट कोहली के स्थान पर टेस्ट टीम की भी कमान सौंपी गई. रोहित ने कम वक्त में ही बतौर कप्तान खुद को साबित किया है. रोहित ने जब से फुलटाइम भारतीय टीम की कमान संभाली है, तब से टीम इंडिया जीत के रथ पर सवार है. रोहित की कप्तानी में भारत ने 7 में से 6 टी20 सीरीज जीती है. वहीं, तीन वनडे सीरीज में भी भारत ने जीत दर्ज की.

 

रोहित के लिए एशिया कप लकी

अब बतौर कप्तान रोहित का पहला बड़ा इम्तिहान एशिया कप होगा. उनके लिए यह टूर्नामेंट लकी रहा है. भारत पिछली बार रोहित की कप्तानी में ही 4 साल पहले एशिया कप जीता था. यह पहला मौका था, जब रोहित ने विराट कोहली की गैरहाजिरी में किसी बड़े टूर्नामेंट में टीम की कमान संभाली थी. इस टूर्नामेंट के लिए विराट को आराम दिया गया था और रोहित की कप्तानी में भारत ने रिकॉर्ड 7वीं बार एशिया कप का खिताब जीता था.

रोहित पहली बार ही एशिया कप में टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे थे और जो काम विराट कोहली नहीं कर पाए, वो उन्होंने पहली बार एशिया कप में टीम की कप्तानी करते हुए सच कर दिखाया था.

 

रोहित की कप्तानी में भारत एशिया कप जीता था

भारत ने 2018 में फाइनल में बांग्लादेश को हराकर एशिया कप का खिताब जीता था. इस मैच में बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी की थी और एक वक्त उसने बिना विकेट गंवाए 120 रन लिए थे. लेकिन, रोहित ने सही समय पर गेंदबाजी में बदलाव किया और सबको चौंकाते हुए पार्ट टाइम स्पिनर केदार जाधव को गेंद थमा दी थी. जाधव भी मेहंदी हसन को आउट कर कप्तान के भरोसे पर खरे उतरे. पहला विकेट गिरने के बाद तो बांग्लादेश के बल्लेबाज एक-एक कर पवेलियन लौटते गए और पूरी टीम 222 रन ही बना सकी. जाधव ने मैच में 2 विकेट लिए थे.

 

रोहित ने दबाव में शानदार कप्तानी की थी

इसके बाद जब बल्लेबाजी की बारी आई तो रोहित ने कप्तानी पारी खेली. उन्होंने सबसे अधिक 48 रन बनाए और टीम की जीत की नींव रखी. लेकिन, बीच में भारतीय पारी लड़खड़ा गई. 37 ओवर तक भारत की आधी टीम पवेलियन लौट गई थी. धोनी, धवन, रोहित सब आउट हो गए थे. केदार जाधव क्रीज पर थे. लेकिन, हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण उनके लिए रन बनाना मुश्किल था.

 

भारतीय टीम दोराहे पर थी. उसे यह फैसला करना था कि आखिरी स्पेशलिस्ट बल्लेबाज के तौर पर केदार को खेलने दिया जाए या उन्हें वापस बुला लिया जाए. लेकिन, रोहित ने जोखिम लेते हुए उन्हें वापस बुला लिया. उस समय भारत को जीत के लिए 72 गेंद में 56 रन की दरकार थी. इसके बाद रवींद्र जडेजा और भुवनेश्वर कुमार ने भारत को जीत की दहलीज तक पहुंचाया. लेकिन, जडेजा आउट हो गए. इसके बाद 48वें ओवर में जाधव बल्लेबाजी के लिए उतरे और भारत को रोमांचक मुकाबले में जीत दिलाई. यह पहला मौका था, जब रोहित ने बड़े मंच पर कप्तानी का जलवा दिखाया.

 

रोहित ने भारत को बनाया था चैम्पियन

इस टूर्नामेंट से पहले इस बात को लेकर संदेह था कि विराट कोहली की गैरहाजिरी में क्या टीम इंडिया एशिया कप जीत पाएगी. क्योंकि रोहित ने इससे पहले, कभी भी बड़े टूर्नामेंट में कप्तानी नहीं थी. लेकिन, भारत ने रोहित की अगुआई में शानदार प्रदर्शन किया और टूर्नामेंट के 6 में से पांच मैच जीते. अफगानिस्तान के खिलाफ मैच टाई रहा था. भारत इकलौता देश था, जो टूर्नामेंट में कोई मैच नहीं हारा था. इस टूर्नामेंट से पहले भी रोहित ने अपनी कप्तानी का लोहा मनवाया था. जब उन्होंने युवा खिलाड़ियों से सजी टीम इंडिया को निदहास ट्रॉफी का खिताब दिलाया था. इस टूर्नामेंट में भी विराट कोहली नहीं खेले थे.

 

निदहास ट्रॉफी और फिर एशिया कप जीत के बाद ही भारतीय क्रिकेट में यह बहस शुरू हुई कि रोहित शर्मा कप्तान के रूप में विराट कोहली से बेहतर हैं. क्योंकि उन्होंने बतौर कप्तान अपने पहले ही बड़े टूर्नामेंट में टीम को चैम्पियन बनाने का कारनामा किया था. विराट कोहली भी ऐसा नहीं कर पाए थे. उन्होंने 2014 के एशिया कप में भारत की कप्तानी थी. लेकिन, भारतीय टीम फाइनल तक में नहीं पहुंच पाई थी.

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