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खेलते समय हो रही थी उल्टी लेकिन डटे रहे, बने मैन ऑफ द सीरीज

भारतीय टीम का यह खिलाड़ी जिसे हम सिक्सर किंग के नाम से जानते हैंउसके क्षेत्ररक्षण की मिसाल दी जाती हैलेकिन जब यह खिलाड़ी बल्ला पकड़कर मैदान में उतरता था तो बस एक ही नाम पवेलियन से सुनाई देता था युवी… युवी… जी हां आप सही समझ रहे हैं हम बात कर रहे हैं युवराज सिंह के बारे मेंऔर वह मैच था विश्व कप 2011 का आखिरी लीग मैच जिसे जीतकर भारत दक्षिण अफ्रीका से मिले हार को भुलाना चाहता थाभारत का आखिरी लीग मैच वेस्ट इंडीज के साथ थाहालांकि इस लीग मैच से पहले ही भारत और वेस्टइंडीज क्वाटरफाइनल में पहुंच गई थीइस मैच में वेस्टइंडीज की तरफ से कई बदलाव किये गए तो भारत ने भी एक दो बदलाव के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया.

इस मैच की शुरुआत दोपहर को दो बजे हुईटॉस जीतने में अव्वल माने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने एक बार फिर से टॉस जीताऔर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला कियामैच की शुरुआत हुई और भारत के सलामी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और गौतम गंभीर सस्ते में पवेलियन चले गएइस मुश्किल हालात में विराट कोहली और युवराज सिंह ने तीसरे विकेट के लिए 122 रनों की शानदार पारी खेली और भारत को उस भंवर से दूर निकालालेकिन युवराज को विराट भी लंबे समय तक साथ नहीं दे सके और 59 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर पवेलियन चले गएलेकिन युवराज सिंह कहा मानने वालों में से वे एक छोर पर टीके रहेयुवराज के इसी पारी के दौरान मैदान में ही कई बार उल्टियां हुई लेकिन उन्होंने अपनी बल्लेबाजी जारी रखाकई बार उन्हें रिटायर हर्ट होने को भी कहा गया लेकिन युवराज सिंह कहां मानने वालों में से थेइस मैच में युवराज सिंह ने 123 गेंदों में 10 चौकों और छक्कों की मदद से 113 रन की शानदार पारी खेलीयुवी के शतक के बदौलत ही भारत 268 रन तक का स्कोर बना पायाउस समय की जो वेस्टइंडीज टीम थी उसके लिए 268 रन का लक्ष्य कोई बड़ा लक्ष्य नहीं था लेकिन भारतीय गेंदबाजों के सामने उनकी एक न चली और यह मैच भारत 80 रनों से जीतने में सफल रहा.

इस मैच के बाद बोलते हुए युवराज सिंह ने कहा था कि पहले मुझे लगा कि उल्टी मुझे गर्मी की वजह से हुईमैं नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरता थालेकिन वीरू वर्ल्ड कप से बाहर हुए तो फैसला किया कि ऊपर जाऊंगा और बड़ा स्कोर करूंगाजब चेन्नैई में शतकीय पारी के दौरान उल्टी हुई तो मैंने ईश्वर से प्रार्थना की– जो भी होअगर मैं मर भी जाऊं तो भी वर्ल्ड कप भारत ही जीते.

अब जरा याद करिए 2011 के विश्वकप का फाइनल भारत 28 साल के बाद विश्वकप को जीतने में दूसरी बार कामयाव रहाइस पूरे विश्वकप में युवराज सिंह का प्रदर्शन सबसे शानदार रहायुवी ने विश्वकप के दौरान 362 रन बनाए तो वहीं 15 विकेट भी अपने नाम कियाइसके बाद वे प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने थेइसी विश्वकप के बाद पता चला की युवराज सिंह को कैंसर है और वे इससे जूझते हुए पूरे विश्वकप में खेल रहे थेइसीलिए मैंने कहा था कि खिलाड़ी महान तब ही बनता है जब वह जज्वा और मेहनत से खेलता हैयुवी ने यहां दिखा दिया था कि वे एक महान खिलाड़ी थे

Nikhil Pratap
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Nikhil Pratap is Editor Head of Best Research. He is Administrative Director who leads the Technology team at bestresearch.in. He is also media advisor at bestresearch.in. Contact: nikhil@bestresearch.in
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