त्र्यंबकेश्वर मंदिर में शिवलिंग पर आया बर्फ, हुआ बड़ा चमत्कार

नाशिक जिल्हे मे प्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर मंदिर मे शिवलिंग पर अपने आप बर्फ जम जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। शिवलिंग पर बर्फ जमने की जानकारी खुद मंदिर के पुजारी ने दि है। मगर शिवलिंग पर किस कारण बर्फ जमी है इसकी पुष्टी अब तक नही की गयी है।

 

शिव जी के बारह ज्योतिर्लिगों में श्री त्र्यंबकेश्वर का दसवां स्थान है। मंदिर के अंदर एक छोटे से गङ्ढे में तीन छोटे-छोटे लिंग विराजमान है। जो की ब्रह्मा, विष्णु और शिव तिनो देवों का प्रतीक हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर ब्रह्मगिरि पर्वत के तलहटी पर बना है। बता दे की त्र्यंबक शब्द का अर्थ ‘त्रिदेवता’ यानी भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश होता है।

 

लोगो का कहना है की जब भी ईशान्य दिशा पर कोई संकट आता है तब यह चमत्कार हुआ है। इससे पूर्व भी वर्ष 1962 मे भारत और चीन का युद्ध हुआ था। इस युद्ध के बाद भी ऐसा ही चमत्कार हुआ था। उस समय भी शिवलिंग पर बर्फ जम गयी थी ऐसी जानकारी त्र्यंबकेश्वर के स्थानिक लोगो ने दि है। वही हालही मे असम राज्य बाढ से बुरी तरह प्रभावित है और त्र्यंबकेश्वर मंदिर मे शिवलिंग पर फिर से बर्फ जम गयी है।

मंदिर के पास ब्रह्मगिरि नामक पर्वत पर गोदावरी नदी का उगम स्थान है। जैसे उत्तर भारत में पापनाशिनी गंगा नदी का जो महत्व है, वैसे ही महत्त्व दक्षिण में गोदावरी का है। जिस तरह गंगा अवतरण का श्रेय महातपस्वी भागीरथ जी को जाता है वैसे ही गोदावरी नदी अवतरण का श्रेय ऋषि गौतम को जाता है। गोदावरी नदी के किनारे बने त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण काले पत्थरों से किया गया है।

 

त्र्यंबकेश्वर मंदिर की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत और अनोखी है। इस मंदिर में कालसर्प दोष और पितृ दोष की पूजा करायी जाती है। यह त्र्यंबक नामक ज्योतिर्लिंग सभी कामनाओं को पूर्ण करता हैं। यह ज्योतिर्लिंग महापापो का नाशक और मुक्ती देने वाला है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य नानासाहेब पेशवे ने वर्ष 1755 मे शुरू करवाया था।

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